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ML-KEM और ML-DSA क्वांटम-प्रतिरोधी एन्क्रिप्शन द्वारा सुरक्षित डिजिटल डेटा।

NIST प्रतियोगिता: दुनिया के पहले पोस्ट-क्वांटम मानकों का चयन और भविष्य की साइबर सुरक्षा

June 21, 2026•By QASM Editorial

वर्ष 2026 में, हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ क्वांटम कंप्यूटिंग अब केवल एक प्रयोगशाला का विषय नहीं रह गई है। जैसे-जैसे क्वांटम क्षमताएं विकसित हो रही हैं, दुनिया भर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की नजरें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (NIST) द्वारा निर्धारित नए मानकों पर टिकी हैं। NIST की 'पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी' (PQC) प्रतियोगिता, जो लगभग एक दशक पहले शुरू हुई थी, अब दुनिया के पहले आधिकारिक सुरक्षा मानकों के रूप में परिणत हो चुकी है।

क्वांटम खतरे को समझना

आज हम जिस RSA और एलिप्टिक कर्व क्रिप्टोग्राफी (ECC) पर भरोसा करते हैं, वे आने वाले समय के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों के सामने टिक नहीं पाएंगे। 'शोर का एल्गोरिदम' (Shor's Algorithm) सैद्धांतिक रूप से वर्तमान के अधिकांश एन्क्रिप्शन को मिनटों में तोड़ सकता है। इसी खतरे को देखते हुए, NIST ने एक वैश्विक स्तर की प्रतियोगिता आयोजित की थी ताकि ऐसे एल्गोरिदम खोजे जा सकें जो न केवल पारंपरिक कंप्यूटरों बल्कि भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के हमलों को भी झेल सकें।

विजेता मानकों का चयन: एक नया युग

NIST ने कठोर परीक्षण और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के बाद कुछ प्रमुख एल्गोरिदम को मानकों के रूप में चुना है। इनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:

  • ML-KEM (पूर्व में Kyber): इसे सामान्य एन्क्रिप्शन के लिए चुना गया है। इसकी गति और कुशलता इसे वेब सुरक्षा (TLS/SSL) के लिए आदर्श बनाती है।
  • ML-DSA (पूर्व में Dilithium): यह डिजिटल हस्ताक्षर के लिए मुख्य मानक है, जो हमारी डिजिटल पहचान और सॉफ्टवेयर अपडेट की प्रमाणिकता सुनिश्चित करेगा।
  • SLH-DSA (Sphincs+): यह एक वैकल्पिक हस्ताक्षर मानक है जिसे सुरक्षा की अतिरिक्त परतों के लिए उपयोग किया जाएगा।

भारत के डिजिटल भविष्य पर प्रभाव

एक उभरती हुई तकनीकी महाशक्ति के रूप में, भारत के लिए ये मानक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI), जिसमें UPI और आधार जैसे तंत्र शामिल हैं, को अब इन नए पोस्ट-क्वांटम मानकों में स्थानांतरित करना शुरू करना होगा। 2026 में, हम देख रहे हैं कि भारतीय टेक कंपनियाँ और सरकारी एजेंसियां 'क्रिप्टोग्राफिक चपलता' (Cryptographic Agility) को अपना रही हैं, ताकि सुरक्षा के इन नए स्तरों को आसानी से लागू किया जा सके।

निष्कर्ष: सुरक्षा की ओर संक्रमण

NIST द्वारा मानकों का यह चयन केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भविष्य के प्रति एक वैश्विक प्रतिबद्धता है। हालांकि यह संक्रमण चुनौतीपूर्ण और महंगा हो सकता है, लेकिन डेटा की अखंडता और गोपनीयता बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य है। आने वाले वर्षों में, हम देखेंगे कि कैसे ये PQC मानक हमारे दैनिक जीवन के हर डिजिटल लेनदेन का आधार बनते हैं।

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